मेनू

सिंहस्थ 2028 — ब्लॉग और लेख

अपनी पवित्र यात्रा के लिए ताज़ा अपडेट, इतिहास और व्यावहारिक गाइड पढ़ें।

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन - 51 शक्तिपीठों में से एक, पूरी जानकारी
History Mythology
Ritu Sharma
Sep 05, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन - 51 शक्तिपीठों में से एक, पूरी जानकारी

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन के 51 शक्तिपीठों में 13वां स्थान रखता है। शिव पुराण के अनुसार यहां देवी सती की कोहनी गिरी थी और देवी मंगल चंडिका के रूप में विराजमान हैं। मराठा काल में रानोजी शिंदे (सिंधिया) ने इसका पुनर्निर्माण कराया। 51 फीट ऊंचे दो दीप स्तंभों पर नवरात्रि में एक हजार से अधिक दीपक जलाए जाते हैं। महाकालेश्वर मंदिर से महज 600 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर उज्जैन के हर तीर्थयात्री की सूची में सबसे ऊपर रहता है।

गोपाल मंदिर उज्जैन: इतिहास, वास्तुकला और धार्मिक महत्व
History Mythology
Ritu Sharma
Sep 04, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

गोपाल मंदिर उज्जैन: इतिहास, वास्तुकला और धार्मिक महत्व

उज्जैन का गोपाल मंदिर, जिसे श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर भी कहते हैं, 19वीं सदी में मराठा शासन के दौरान महारानी बायजाबाई शिंदे ने बनवाया था। यह मंदिर मराठा वास्तुकला, काले पत्थर की कृष्ण प्रतिमा और चांदी के दरवाजों के लिए जाना जाता है। यहाँ हर साल हरिहर मिलन और जन्माष्टमी की परंपराएं श्रद्धालुओं को खींचती हैं। महाकाल मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर पत्नी बाजार में स्थित इस मंदिर में प्रवेश नि:शुल्क है।

चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन: इतिहास, तीन प्रतिमाएं और दर्शन गाइड
History Mythology
Ritu Sharma
Sep 03, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन: इतिहास, तीन प्रतिमाएं और दर्शन गाइड

उज्जैन से लगभग 7 किलोमीटर दूर ग्राम जवास्या में स्थित चिंतामन गणेश मंदिर मध्य प्रदेश के प्राचीनतम गणेश तीर्थों में गिना जाता है। यहाँ एक ही गर्भगृह में तीन अलग-अलग स्वयंभू गणेश स्वरूप विराजमान हैं, यह संयोग भारत में बहुत कम जगह मिलता है। परमारकालीन नक्काशीदार स्तंभ, श्रीराम की वन-यात्रा से जुड़ी पुरानी मान्यता और लक्ष्मण बावड़ी; इस मंदिर को समझना दर्शन से पहले ज़रूरी है।

उज्जैन का सतीगेट: अकबर की दीवार से सिंहस्थ 2028 तक
History Mythology
Ritu Sharma
Sep 02, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

उज्जैन का सतीगेट: अकबर की दीवार से सिंहस्थ 2028 तक

उज्जैन का सतीगेट उस शहर-दीवार का हिस्सा था जो अकबर ने उज्जैन की सुरक्षा के लिए बनवाई थी। नदी दरवाजा, कालियादेह दरवाजा, सती दरवाजा, देवास दरवाजा और इंदौर दरवाजा ये पाँच द्वार मुगलकालीन उज्जैन के प्रवेश-बिंदु थे। मई 2026 में सड़क चौड़ीकरण के दौरान सती माता मंदिर के भीतर दबा एक प्राचीन द्वार फिर सामने आया। और अब सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में इस पूरे मार्ग को नया रूप दिया जा रहा है।

टॉवर चौक, उज्जैन: वह घंटाघर जो पूरे शहर को जोड़ता है
History Mythology
Ritu Sharma
Sep 02, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

टॉवर चौक, उज्जैन: वह घंटाघर जो पूरे शहर को जोड़ता है

टॉवर चौक वह जगह है जहाँ से उज्जैन चलता है। फ्रीगंज इलाके में उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन से महज 240 मीटर दूर स्थित यह घंटाघर पीढ़ियों से शहर का केंद्रीय संदर्भ बिंदु रहा है। दिन में यहाँ व्यापार होता है, शाम को नाइट मार्केट सजती है, और रात को रोशन मीनार की छाया में पूरा शहर एक जगह जमा होता है। छात्र हों, स्थानीय लोग हों, या पहली बार आने वाले तीर्थयात्री - सब टॉवर चौक से गुजरते हैं।

राणो जी की छत्री – रामघाट पर सिंधिया वंश की ऐतिहासिक धरोहर
History Mythology
Ritu Sharma
Aug 31, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

राणो जी की छत्री – रामघाट पर सिंधिया वंश की ऐतिहासिक धरोहर

उज्जैन, भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी, अनगिनत अद्भुत स्थलों से सजी हुई है। इन्हीं में से एक अनमोल धरोहर है राणो जी की छत्री, जो पवित्र रामघाट पर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह छत्री सिंधिया वंश की धार्मिकता, वीरता और इतिहास का जीता-जागता प्रतीक है।

उज्जैन जंतर मंतर: इतिहास, यंत्र और वैज्ञानिक विरासत
History Mythology
Ritu Sharma
Aug 30, 2026 Ritu Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

उज्जैन जंतर मंतर: इतिहास, यंत्र और वैज्ञानिक विरासत

उज्जैन की वेध शाला (जंतर मंतर) 1725 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनवाई थी। भारत में बनी 5 वेधशालाओं में से यह एकमात्र है जो आज भी सक्रिय शोध केंद्र के रूप में काम कर रही है। यहाँ के पाषाण यंत्र अब भी सौर समय और ग्रहों की स्थिति मापते हैं, बिना किसी आधुनिक तकनीक के। इतिहास और विज्ञान दोनों में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह स्थल अनिवार्य है।

आनंद अखाड़ा: इतिहास, परंपरा और सिंहस्थ 2028 में भूमिका
Spiritual Guides
Umesh Kant Sharma
Aug 29, 2026 Umesh Kant Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

आनंद अखाड़ा: इतिहास, परंपरा और सिंहस्थ 2028 में भूमिका

आनंद अखाड़ा 7 शैव अखाड़ों में दूसरा सबसे प्राचीन है, जिसे 855 ई. में सूर्यनारायण को इष्टदेव मानकर पुनर्स्थापित किया गया था। यह निरंजनी अखाड़े से संबद्ध है और आदि शंकराचार्य द्वारा संगठित दशनामी संप्रदाय का अंग है। इसका प्राथमिक मुख्यालय नासिक में है और उत्तर भारत का प्रमुख केंद्र अलखनाथ मंदिर, बरेली में है। सिंहस्थ 2028 में आनंद अखाड़ा 9 अप्रैल, 23 अप्रैल और 8 मई 2028 को शाही स्नान में भाग लेगा।

निरंजनी अखाड़ा: इतिहास, परंपरा और सिंहस्थ 2028 में भूमिका
Spiritual Guides
Umesh Kant Sharma
Aug 29, 2026 Umesh Kant Sharma
सत्यापित विशेषज्ञ

निरंजनी अखाड़ा: इतिहास, परंपरा और सिंहस्थ 2028 में भूमिका

निरंजनी अखाड़ा सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 में भाग लेने वाले 13 अखाड़ों में दूसरा सबसे बड़ा है। 904 ई. में कच्छ मांडवी, गुजरात में स्थापित, यह एकमात्र प्रमुख शैव अखाड़ा है जिसका प्राथमिक इष्टदेव कार्तिकेय हैं। मुख्यालय दारागंज, प्रयागराज में है, शाखाएं उज्जैन और उदयपुर में हैं। आनंद अखाड़ा इससे संबद्ध है। सिंहस्थ 2028 में निरंजनी के नागा साधु 9 अप्रैल, 23 अप्रैल और 8 मई 2028 को शाही स्नान जुलूस में भाग लेंगे।

अभी चर्चा में

लोकप्रिय सिंहस्थ गाइड

2028 के लिए सभी आध्यात्मिक अपडेट और सुझाव यहाँ पाएँ।