सिंहस्थ 3D — ग्रह दर्शन
सिंहस्थ ब्रह्मांड (Simhastha Cosmos) में वर्चुअल सिंहस्थ का अनुभव करें। बृहस्पति जब सिंह राशि में आता है, तब उज्जैन में कुंभ होता है।
कुंभ मेला क्या है?
कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार चार स्थानों हरिद्वार, इलाहाबाद (प्रयाग), नासिक और उज्जैन में आयोजित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र आयोजन के दौरान पूरे स्थान पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह एक सामाजिक सद्भाव का पर्व है जहां आपको एक ही स्थान पर कई संतों का समागम देखने को मिलता है। यह आयोजन आपको इन पवित्र संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर भी देता है।
विभिन्न राशियों में सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति (गुरु) की स्थिति इन स्थानों में से प्रत्येक में कुंभ के स्थान को निर्धारित करती है।
4 कुंभ स्थान और ग्रहों की स्थिति
हरिद्वार में कुंभ
जब सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति कुंभ राशि में होता है, तो यह हरिद्वार में आयोजित किया जाता है।
प्रयाग में कुंभ
जब सूर्य मकर राशि में और बृहस्पति वृषभ राशि में होता है, तो यह इलाहाबाद (प्रयाग) में आयोजित किया जाता है।
नासिक में कुंभ
जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करता है तो यह नासिक में आयोजित किया जाता है। यह नासिक में तब भी आयोजित किया जाता है जब बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा अमावस्या के दिन कर्क राशि में प्रवेश करते हैं।
उज्जैन में कुंभ (सिंहस्थ) मुख्य
भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक, उज्जैन, मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। उज्जैन में कुंभ तब आयोजित किया जाता है जब ग्रहों का एक दुर्लभ विन्यास होता है, जो हर 12 साल में एक बार होता है। जब सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति सिंह राशि में होता है, तो यह उज्जैन में आयोजित किया जाता है। संस्कृत में 'सिंह' का अर्थ 'Leo' (सिंह राशि) होने के कारण इसकी प्रासंगिकता को देखते हुए, कुंभ को 'सिंहस्थ कुंभ' के रूप में भी जाना जाता है।
यह एक महान स्नान पर्व है जिसमें दुनिया भर से हजारों श्रद्धालु इस महीने भर चलने वाले समागम का जश्न मनाने के लिए एक साथ आते हैं। यह औपचारिक स्नान चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन पवित्र शिप्रा नदी में होता है और पूरे वैशाख माह के दौरान विभिन्न अंतरालों पर जारी रहता है जिसका समापन दसवीं पूर्णिमा के दिन होता है।
कुंभ स्थान और ग्रह-योग
गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम।
पवित्र घाट जहाँ अमृत की बूँदें गिरी थीं।
दुर्लभ योग — सूर्य और बृहस्पति दोनों एक साथ सिंह राशि में।
सिंह राशि में बृहस्पति → सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 का आयोजन।