प्रतिहारेश्वर महादेव उज्जैन: नंदी, अग्नि और शाप
सिंहस्थ 2028: निर्माण में कमी पर पेनाल्टी, शिप्रा परियोजना 84% पूरी
नागचंद्रेश्वर महादेव उज्जैन: निर्माल्य और नागचण्ड गण
कलकलेश्वर महादेव उज्जैन: काली, कलह और कोलाहल
अप्सरेश्वर महादेव उज्जैन: रम्भा, इन्द्र और नारद
40 करोड़+
अपेक्षित श्रद्धालु
62 दिन
सबसे लंबा सिंहस्थ
₹25,000 करोड़
बुनियादी ढांचे का बजट
12 वर्ष
एक बार का खगोलीय संयोग
मंदिर दर्शन एवं आध्यात्मिक गाइड
इतिहास एवं पौराणिक महत्व
ढुण्ढेश्वर महादेव उज्जैन: रम्भा के नृत्य से सिद्धि तक की कथा
उज्जैन के 84 महादेवों में तीसरा स्थान ढुण्ढेश्वर महादेव का है। स्कन्दपुराण के अनुसार शिव का गण ढुण्ढ इंद्रलोक में रम्भा का नृत्य देखकर मोहित हो गया और उस पर फूलों का गुच्छा फेंक बैठा। इंद्र के शाप से वह धरती पर गिरा, तीर्थों में भटका, और आकाशवाणी के कहने पर महाकालवन पहुँचकर सिद्धि पाई। जानिए पूरी कथा, फल और वे बातें जो पाठ में नहीं हैं।
गुहेश्वर महादेव उज्जैन: जब एक ऋषि के नाच से डोल उठी सृष्टि
उज्जैन के 84 महादेवों में दूसरा स्थान गुहेश्वर महादेव का है। स्कन्दपुराण के अनुसार मंकणक ऋषि के हाथ से खून की जगह शाकरस निकला, तो वे गर्व से नाचने लगे और उनके साथ पूरा जगत डोलने लगा। शिव ने ब्राह्मण-वेश में आकर उनका गर्व तोड़ा और उन्हें महाकालवन की गुहा में स्थित लिंग के दर्शन के लिए भेजा। जानिए पुराण की कथा, महाभारत से उसका संबंध और दर्शन का फल।
अगस्त्येश्वर महादेव उज्जैन: ब्रह्महत्या से मुक्ति की कथा
उज्जैन के 84 महादेवों की गिनती अगस्त्येश्वर महादेव से शुरू होती है। स्कन्दपुराण के अनुसार महर्षि अगस्त्य ने देवताओं को बचाने के लिए हज़ारों दानव जला दिए और इसी से उन पर ब्रह्महत्या का दोष लगा। ब्रह्मा के बताए लिंग की आराधना से वे मुक्त हुए और शिव ने लिंग को उन्हीं का नाम दिया। जानिए पुराण की असली कथा, पूजा के दिन और वे बातें जो कथा से मेल नहीं खातीं।
आपकी पवित्र यात्रा के लिए संपूर्ण जानकारी
तिथियां, यात्रा, आवास और आध्यात्मिक अनुभवों की विस्तृत गाइड के साथ उज्जैन तीर्थयात्रा की योजना बनाएं।
तिथियां और कार्यक्रम
शाही स्नान और पर्व स्नान की सम्पूर्ण तिथियां - ज्योतिषीय मुहूर्त और अनुष्ठान विवरण सहित।
तिथियां देखेंउज्जैन कैसे पहुंचें
दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर और अन्य शहरों से ट्रेन, फ्लाइट और सड़क मार्ग की जानकारी।
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कुंभ मेला घाटों के पास होटल, टेंट सिटी, धर्मशाला और बजट ठहरने के विकल्प।
ठहरने की जगह खोजेंशाही स्नान - सिंहस्थ 2028 के राजसी स्नान
शिप्रा नदी में पवित्र डुबकी के सबसे शुभ दिन, जब अखाड़ों की भव्य शोभायात्राएं लाखों श्रद्धालुओं को पावन घाटों तक ले जाती हैं।
प्रथम शाही स्नान - पूर्णिमा
9 अप्रैल, 2028 (रविवार)
चैत्र-वैशाख पूर्णिमा के दिन प्रथम राजसी स्नान। भव्य अखाड़ा शोभायात्राओं के साथ सबसे पवित्र स्नान पर्व का शुभारंभ।
द्वितीय शाही स्नान - वैशाख अमावस्या
24 अप्रैल, 2028 (सोमवार)
अमावस्या स्नान, जो आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
तृतीय शाही स्नान - वैशाख पूर्णिमा
8 मई, 2028 (सोमवार)
सर्वाधिक शुभ अक्षय तृतीया स्नान। इस दिन अर्जित किया गया कोई भी पुण्य अक्षय और अविनाशी माना जाता है।
+ 27 मार्च से 27 मई, 2028 के बीच 7 पर्व स्नान तिथियां। पूरा कार्यक्रम देखें →