यह मंदिर कहां है?

उज्जैन के सतीगेट पर स्थित श्री संकट मोचन खड़े हनुमान जी मंदिर लगभग 170 साल पुराना है। एक ही पुजारी परिवार की 5 पीढ़ियां इस मंदिर की सेवा करती आई हैं। यह मंदिर 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का भी साक्षी रहा है। मुख्य प्रतिमा 8 फीट ऊंची खड़ी हनुमान जी की है जो परमार काल की मालवा की विशेष बेसाल्ट शिला परंपरा में बनी मानी जाती है।

बुलडोजर क्यों आया?

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन नगर निगम कांठल चौराहे से छत्री चौक तक 410 मीटर सड़क को 15 मीटर चौड़ा कर रहा है। यह महाकाल की शाही सवारी का प्रस्तावित मार्ग है। इस मार्ग में खड़े हनुमान मंदिर भी आता था। नगर निगम की योजना प्रतिमा को टंकी चौक पर स्थानांतरित करने की थी।

4 दिन में क्या-क्या हुआ?

  • 30 अगस्त 2026: विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और श्रद्धालुओं ने राजमार्ग जाम किया। 5 घंटे धरना। हनुमान चालीसा पाठ। पहला प्रयास रोका गया।
  • 3–4 सितंबर: बारिश और विरोध के बीच भारी पुलिस बंदोबस्त में मंदिर की दीवारें और शिखर गिराए गए। क्रेन और खुदाई मशीन प्रतिमा तक पहुंची – लेकिन प्रतिमा नहीं हिली।
  • 5 सितंबर, शनिवार: तीसरा प्रयास विफल। पुजारी महेश बैरागी ने बताया कि नींव में ताला-विधि मिली है। पुरातत्व विशेषज्ञ बुलाए गए।
  • 6 सितंबर, रविवार: 40 से ज्यादा घंटे बाद भी प्रतिमा अपनी जगह। शाम को 50 से ज्यादा बंदर मंदिर परिसर में आकर घंटों शांत बैठे रहे – वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुजारी महेश बैरागी अस्पताल में भर्ती।
  • 7 सितंबर, सोमवार: चौथा प्रयास भी विफल। महापौर मुकेश तटवाल मौके पर पहुंचे। भारी मशीनरी बंद। भू-जांच का आदेश।

ताला-विधि क्या है?

विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमन सोलंकी ने बताया कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा परमार काल में राजा भोज के समय – लगभग 1000 साल पहले – की बेसाल्ट शिला नक्काशी परंपरा से बनी है। प्रतिमा पर सिंदूर की मोटी परत चढ़ी होने से मूल स्वरूप छुपा है।

प्रतिमा के नीचे ताला-विधि की नींव है – यानी पत्थर जमीन के अंदर एक-दूसरे में इस तरह जकड़े हैं कि वैज्ञानिक खुदाई के बिना हिलाना असंभव है। क्रेन से जबरदस्ती करते तो प्रतिमा टूट सकती थी। विशेषज्ञ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक विधि से ही स्थानांतरण की सिफारिश की।

महापौर और प्रशासन ने क्या कहा?

महापौर मुकेश तटवाल (7 सितंबर 2026, मौके पर): "महाकाल की राजसी सवारी तक कोई कार्रवाई नहीं। उसके बाद तकनीकी भू-जांच के आधार पर फैसला होगा। श्रद्धालुओं की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा।"

नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा: सभी पक्षों से चर्चा और तकनीकी स्वीकृति के बाद ही आगे बढ़ा जाएगा। एसजीएसआईटीएस इंदौर के अभियांत्रिकी विशेषज्ञों और राज्य पुरातत्व विभाग से सलाह ली जा चुकी है।

पुजारी महेश बैरागी, जो हृदय रोगी हैं, इस तनाव के दौरान पाटीदार अस्पताल में भर्ती हो गए। उन्होंने प्रशासन के दस्तावेज कानूनी जांच के लिए भेजे।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

हजारों श्रद्धालु भावुक अंतिम आरती के लिए जुटे। रात भर हनुमान चालीसा गूंजती रही। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और युवा कांग्रेस ने विरोध जताया। उज्जैन में हनुमान भक्ति आंदोलन खड़ा हो गया।

मांग उठी कि टंकी चौक का नाम "हनुमान चौराहा" रखा जाए और नए स्थान पर भव्य मंदिर बनाया जाए। श्रद्धालुओं के बीच यह बात आम हो गई कि जब बजरंगबली खुद नहीं हिलना चाहते, तो कोई मशीन क्या करेगी।

सिंहस्थ 2028 और इस मार्ग का संबंध

कांठल–छत्री चौक सड़क सीधे शाही सवारी मार्ग पर है। सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे। प्रतिमा का भविष्य इस पूरे मार्ग की योजना को प्रभावित करेगा।

आगे तीन विकल्प

  • विकल्प 1: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक विधि से टंकी चौक पर सुरक्षित स्थानांतरण – भू-जांच रिपोर्ट के बाद।
  • विकल्प 2: प्रतिमा को मूल स्थान पर रखकर सड़क का मार्ग बदलना।
  • विकल्प 3: मूल स्थान पर भव्य मंदिर पुनर्निर्माण – श्रद्धालु संगठनों और युवा कांग्रेस की मांग।

7 सितंबर 2026 तक कोई न्यायालय याचिका या स्थगनादेश दाखिल नहीं हुआ था।