उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के सड़क कार्यों को लेकर अधिकारियों ने क्या निर्देश दिए?

आशीष सिंह और रौशन कुमार सिंह ने उज्जैन में सड़क एवं अधोसंरचना परियोजनाओं का दो चरणों में निरीक्षण किया। कलेक्टर कार्यालय की निरीक्षण श्रृंखला में ये क्रमांक 98 और 100 हैं। उन्होंने शंकराचार्य चौराहा से मुरलीपुरा तक की सड़क के लिए मार्च 2027 की समय-सीमा तय की। हरिफाटक ब्रिज अंडरपास पर तीन एजेंसियों को आपसी समन्वय से काम करने को कहा गया। साथ ही सिंहस्थ बायपास और उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन की समीक्षा की गई।

पहले निरीक्षण में क्या हुआ?

पहला पड़ाव हरिफाटक ब्रिज के नीचे प्रस्तावित अंडरपास था। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) को एक साझा कार्ययोजना बनाने और काम तेज करने के निर्देश दिए गए।

शंकराचार्य चौराहा से मुरलीपुरा तक की सड़क मार्च 2027 तक पूरी करनी है। ड्रेनेज, पेयजल पाइपलाइन और बिजली के खंभे शिफ्ट करने का काम भी तय समय-सीमा में पूरा होना चाहिए।

अधिकारियों ने केटीएम शोरूम से नीलगंगा चौराहा तक मार्ग चौड़ीकरण और सांवेर रोड से जुड़ने वाले जंक्शन की कार्ययोजना की भी समीक्षा की। मकसद दोनों जगह यातायात को सुगम बनाना है।

दूसरे निरीक्षण में क्या-क्या देखा गया?

दूसरे दौर की शुरुआत सिंहस्थ बायपास से हुई, जहां टीम ने 19.8 किमी लंबे हिस्से का निरीक्षण किया। इसके बाद उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन के निर्माण कार्य देखे गए और आखिर में काला पत्थर चौराहे पर पहुंचे। वहां अधिकारियों ने यातायात को ज्यादा सुरक्षित और सुगम बनाने वाली कार्ययोजना तैयार करने को कहा।

आशीष सिंह ने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाएं समय पर पूरी करें, हर चरण में गुणवत्ता जांचें और नियमित निगरानी रखें।

श्रद्धालुओं के लिए यह खबर अभी क्यों मायने रखती है?

निरीक्षण में जिन सड़कों का नाम आया, उनमें से ज्यादातर शहर के भीतर या शहर के प्रवेश मार्गों पर हैं। अगर आप हरिफाटक, शंकराचार्य चौराहा, नीलगंगा या सांवेर रोड के आसपास रहते या काम करते हैं, तो हर सड़क पूरी होने तक ड्रेनेज, पाइपलाइन और खंभे शिफ्ट करने का काम चलता रहेगा।

बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए बायपास अहम है। अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट में इसे ऐसा मार्ग बताया गया, जिससे बदनावर, गरोठ, देवास और इंदौर की ओर से आने वाले वाहन उज्जैन शहर के बीच से गुजरे बिना सिंहस्थ मेला क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे।

रु. 700 करोड़ की लागत वाले 19.81 किमी लंबे उज्जैन बायपास को राज्य मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2024 में मंजूरी दी थी। यह लंबाई इस सप्ताह निरीक्षण किए गए हिस्से से मेल खाती है।

उज्जैन-जावरा कॉरिडोर से यात्रा में क्या बदलेगा?

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे 98.73 किमी लंबा है और इसकी लागत रु. 5,017 करोड़ है। यह उज्जैन के पास मंगरोला से शुरू होकर आठ लेन के इंटरचेंज के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जुलाई 2026 में इसका निर्माण शुरू कराया।

एक रिपोर्ट के अनुसार इसके पूरा होने का लक्ष्य दिसंबर 2027 है। राज्य के अधिकारियों को उम्मीद है कि राजस्थान और गुजरात से आने वाले श्रद्धालु इसी मार्ग का इस्तेमाल करेंगे।

सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 कब है?

ज्यादातर स्रोतों के अनुसार उज्जैन में मुख्य आयोजन 27 मार्च से 27 मई 2028 के बीच होगा।

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