क्या हुआ आज उज्जैन में?

मंगलवार को शिप्रा नदी के किनारे राणोजी की छत्री पर ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन हुआ। चेन्नई, दिल्ली और गुरुग्राम की विशेषज्ञ कंपनियों ने अपने हाईटेक ड्रोन उड़ाकर दिखाए। मौके पर एडीजी राकेश गुप्ता, संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन और एसपी प्रदीप शर्मा मौजूद रहे।

Source: Mediawala — July 2026. Subject to official confirmation closer to the event.

ड्रोन कितनी दूर तक निगरानी कर सकते हैं?

डेमो में दिखाए गए वायरलेस ड्रोन करीब 8 किलोमीटर के दायरे तक तेज़ रफ्तार से निगरानी करने में सक्षम बताए गए। जरूरत पड़ने पर ये किसी भी जगह अचानक भेजे जा सकते हैं।

Source: Mediawala — July 2026. सिंहस्थ की तैयारी अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए अंतिम रेंज और तैनाती की संख्या बदल सकती है।

अधिकारियों ने किन बातों पर ध्यान दिया?

अफसरों ने ड्रोन की तकनीकी क्षमता, रेंज, कैमरा गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन में इसके उपयोग की जानकारी ली। शिप्रा तट, घाटों, प्रमुख मार्गों और मेला क्षेत्र की गतिविधियों का लाइव सर्विलांस दिखाया गया। कुछ ड्रोन में पीए सिस्टम भी लगा है, जिससे मौके पर अनाउंसमेंट भी हो सकेगा। कैथोड और नॉन-कैथोड, दोनों तरह के ड्रोन दिखाए गए। कुल छह-सात ड्रोन का प्रदर्शन हुआ, जिन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर चुकी टीमों ने उड़ाया।

क्यों जरूरी है यह तीर्थयात्रियों के लिए?

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि 2028 में सिंहस्थ के दौरान करीब 40 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे और शिप्रा में डुबकी लगाएंगे। इतनी बड़ी भीड़ को संभालना आसान नहीं है। ड्रोन कैमरों से भीड़ का दबाव, घाटों पर मौजूद श्रद्धालुओं की संख्या और रास्तों की स्थिति रियल टाइम में कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। इससे किसी भी हादसे या भगदड़ जैसी स्थिति में मदद जल्दी पहुंचाई जा सकेगी।

Source: कलेक्टर रौशन कुमार सिंह का बयान, Mediawala, जुलाई 2026। श्रद्धालुओं की संख्या का यह अनुमान अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग है, आधिकारिक पुष्टि आयोजन नज़दीक आने पर होगी।

यात्रियों और स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

ड्रोन का उपयोग सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने में भी यह काम आएगा। एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि आने वाले सिंहस्थ महापर्व और श्रावण मास की सवारी को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कंपनियों के सिस्टम परखे जा रहे हैं। डेमो देखने के बाद तय होगा कि किस तरह के ड्रोन आखिर में इस्तेमाल होंगे।

बुनियादी ढांचे पर काम कहां तक पहुंचा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर उज्जैन में सड़क, पुल, घाट, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और यातायात से जुड़े काम लगातार चल रहे हैं। ड्रोन डेमो इसी बड़ी तैयारी की एक कड़ी है, जिसका मकसद सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना है।