सिंहस्थ के इस ट्रैफिक प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ हुई है?
यह सड़क और पुल एक ही कॉरिडोर का हिस्सा हैं, जो इंदौर की तरफ से सिंहस्थ 2028 क्षेत्र तक ट्रैफिक लाने के लिए बनाया जा रहा है। लेकिन दोनों संरचनाएं एक-दूसरे से मिल नहीं रहीं।
क्षिप्रा नदी पर बन रहा पुल फिलहाल खेतों की तरफ बढ़ रहा है, न कि उस सड़क की तरफ जिससे उसे जुड़ना था।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों संरचनाओं की दिशा में करीब 30 डिग्री का फर्क है। इस वजह से सड़क का रूट बदलना पड़ सकता है और निजी जमीन का अधिग्रहण भी करना पड़ सकता है।
36.64 करोड़ रुपये का यह सिंहस्थ प्रोजेक्ट है क्या?
यह प्रोजेक्ट इंदौर और उससे जुड़े रास्तों से आने वाले वाहनों के लिए सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 से पहले एक ट्रैफिक रूट तैयार करने के मकसद से बनाया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित सड़क डी-मार्ट क्षेत्र के पास से शुरू होकर महावीर बाग रोड और एमआर-21 की तरफ जाती है। इसी कॉरिडोर के तहत क्षिप्रा नदी पर एक नया पुल भी बनाया जा रहा है।
रिपोर्ट में बताई गई लागत इस तरह है:
- सड़क निर्माण: 23.26 करोड़ रुपये
- क्षिप्रा नदी पुल: 13.38 करोड़ रुपये
- कुल लागत: 36.64 करोड़ रुपये
रिपोर्टों के मुताबिक सड़क का काम उज्जैन नगर निगम देख रहा है, जबकि पुल का निर्माण सेतु विभाग कर रहा है।
स्रोत: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स, 25 अगस्त 2026। यह आंकड़े इन्हीं रिपोर्टों पर आधारित हैं, जिनकी पुष्टि जहां संभव हो वहां आधिकारिक प्रोजेक्ट रिकॉर्ड से भी की जानी चाहिए।
सड़क और पुल की दिशा अलग-अलग कैसे हो गई?
असली दिक्कत सड़क और पुल की दिशा में आया फर्क है।
ड्रोन तस्वीरों और सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण में सामने आया कि दोनों संरचनाओं की दिशा में करीब 30 डिग्री का अंतर है।
सड़क का मिट्टी का काम संबंधित हिस्से में पूरा हो चुका है, और क्षिप्रा पुल के पिलर भी खड़े हो चुके हैं। यानी काफी काम हो जाने के बाद यह गड़बड़ी सामने आई है।
पुल को सिकंदरी और दौडखेड़ी की तरफ जाने वाली सड़क से जुड़ना था। यह रूट सिंहस्थ की बड़ी ट्रैफिक योजना से जुड़ा है।
लेकिन अभी पुल की दिशा खेतों की जमीन की तरफ जाती दिख रही है।
रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि अधिकारी सड़क की दिशा बदलने पर विचार कर रहे हैं, ताकि वह आखिरकार पुल से मिल सके।
इस गड़बड़ी पर अधिकारियों ने क्या कहा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेतु निगम के कार्यपालन यंत्री पी.एस. पंत ने कहा कि पुल स्वीकृत योजना के अनुसार ही बनाया जा रहा है, और विभाग इसे गलत नहीं मानता।
वहीं उज्जैन नगर निगम के अधीक्षण यंत्री आर.के. जैन ने माना कि पुल और सड़क के रूट आपस में मेल नहीं खा रहे। उन्होंने बताया कि यह मामला संबंधित विभाग के सामने रखा गया है, और अब सड़क का रूट बदलना होगा, जिसके लिए अतिरिक्त जमीन भी लेनी पड़ेगी।
इस गड़बड़ी की तकनीकी जिम्मेदारी किसकी है, यह अब एक बड़ा सवाल बन गया है।
रिपोर्टों में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या निर्माण शुरू होने से पहले दोनों एजेंसियों ने मिलकर रूट का सर्वे और अंतिम जुड़ाव बिंदु की जांच की थी।
क्या अब किसानों की जमीन पर असर पड़ सकता है?
अगर सड़क को मोड़कर पुल से जोड़ा जाता है, तो अधिकारियों को ऐसी जमीन चाहिए होगी जो मूल सड़क के रूट में शामिल नहीं थी।
इससे कृषि भूमि और निजी संपत्तियां भी प्रोजेक्ट के दायरे में आ सकती हैं। रिपोर्टों में उन किसानों के विरोध का भी जिक्र है जो नई जमीन की मांग से प्रभावित हो सकते हैं।
उज्जैन जिले के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि सिंहस्थ बायपास और कई अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े भूमि-अधिग्रहण के नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इनमें 4 नवंबर 2025 का धारा 21 का सिंहस्थ बायपास नोटिस और धारा 7 का सिंहस्थ बायपास सड़क नोटिस शामिल है।
इस खास सड़क-पुल जुड़ाव को ठीक करने के लिए आगे और जमीन अधिग्रहण होगा या नहीं, यह संशोधित रूट और आधिकारिक फैसलों पर निर्भर करेगा।
सिंहस्थ 2028 के श्रद्धालुओं के लिए यह क्यों मायने रखता है?
उज्जैन की सिंहस्थ 2028 ट्रैफिक योजना में इस रूट की अहम भूमिका है।
प्रस्तावित कॉरिडोर का मकसद यह है कि इंदौर की तरफ से आने वाले वाहन सीधे चिंतामन गणेश मंदिर और सिंहस्थ क्षेत्र तक पहुंच सकें, बिना पूरे शहर के बीच से गुजरे।
अगर यह बायपास कनेक्शन ठीक से काम करे, तो सिंहस्थ के दौरान शहर की सड़कों पर दबाव कम हो सकता है।
लेकिन दिशा में आई इस गड़बड़ी का मतलब है कि यह कॉरिडोर पूरी तरह चालू होने से पहले कनेक्टिंग रूट में फिर से डिज़ाइन का काम करना पड़ सकता है।
सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 के लिए बन रहे इस प्रोजेक्ट में आगे यह देखा जाएगा कि सड़क का रूट बदला जाता है या नहीं, कितनी अतिरिक्त जमीन चाहिए होगी, इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी किसकी तय होती है, और इससे निर्माण की समयसीमा पर क्या असर पड़ता है।
आगे क्या होगा?
रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारी अब सड़क के रूट को इस तरह बदलने की तैयारी कर रहे हैं कि वह क्षिप्रा पुल से जुड़ सके।
अभी जो मुख्य मुद्दे बचे हैं, वे इस तरह हैं:
- संशोधित सड़क रूट की अंतिम मंजूरी
- डायवर्जन के लिए जरूरी अतिरिक्त जमीन
- भूमि अधिग्रहण और प्रभावित मालिकों की आपत्तियां
- रूट सुधार पर होने वाला अतिरिक्त खर्च
- प्लानिंग में हुई इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी
- प्रोजेक्ट की पूरी होने की समयसीमा पर असर
साइट पर पुल के पिलर और सड़क का मिट्टी का काम पहले से पूरा हो चुका है, इसलिए यह सुधार सिर्फ एक सामान्य डिज़ाइन बदलाव नहीं रह जाता। रूट को लेकर होने वाला अंतिम आधिकारिक फैसला यह तय करेगा कि उज्जैन इस कॉरिडोर को अपने बड़े सिंहस्थ 2028 ट्रैफिक नेटवर्क से कैसे जोड़ता है।
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